*जीवन एक कला है,कलह ना बनने दो*
*किसी की आँख के पानी की खुद को *
*वजह ना बनने दो *
*जीवन में खुशियों को लुटाते हुए चलो *
*गमों को ,दर्द को भूलाते हुए चलो *
*जहान अपना है,नफरत की जगह ना बनने दो *
*गिरते को उठाना कर्म हो अपना *
*कोई ना धर्म हो,बस मानवता ही धर्म हो अपना *
*अपने वजूद में कहीं नफरत ना पलने दो *
*गिले शिकवे नहीं करते,तूझे सब भूल जाना है *
*दर्द में मुस्कुराना है,खुशी से गुनगुनाना है*
सजा के रखें हर पल को,इसे सजा ना बनने दो
किसी के आँख के पानी का खुद को बजह ना बनने दो
अचला एस गुलेरिया
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