हमारे दिल के दफ़्तर में तबादले कहाँ
:::::; ऐ दिलरुबा:::::::
यहाँ जो एक बार आया बस यहीं रह गया
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सुलगते रहते हैं कुछ सवाल ज़हन में,
आजकल के रिश्ते बुझे-बुझे से क्यूँ हैं।।
🍁🍁🍁🍁सुलगते रहते हैं कुछ सवाल ज़हन में,
🍁🍁🍁🍁🍁आजकल के रिश्ते बुझे-बुझे से क्यूँ हैं।।
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