हम सबको को मानते हैं अपना
हमें अपना ,अंपना सिर्फ़ तुम मानते हो ✍
मेरी मुस्कान पर फिदा है जमाना सारा
मेरे गुमनाम जख्मों का पता तुम जानते हो ✍ अचला का असला. shayaripub.com.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें