होली पे मिलने का दस्तूर तुम कुछ यूँ निभा जाना
Achlasguleria
मैं आसमान से गुलाल गिराऊँ तुम छत पर आ जाना
हर मुलाक़ात इशारा है कुदरत का,
Shayaripub.in
रंग किसी का किसी पर तो चढ़ेगा ज़रूर!
तुम अपने रंग में जो रंग लो तो होली है ,
Shayaripub.in
नहीं तो रंगों का त्योहार आज भी एक पहेली है....!!
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें