jai mata di

नफरत भी कोई करने की चीज है....
सब्र कीजिये रहम कीजिये...
माफ कीजिये ..और मौहब्बत कीजिये....
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मिलन, ख़्वाब, उल्फ़त या मुहब्बत से सजा मुझको मेरे किरदार को तासीर दे…आ गुनगुना मुझको            Shayaripub.in