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🍁Har Har Mahadev🍁



# *शिवरूद्राष्टकम* 
न जानामि योगं जपं नैव पूजां 
नतोऽहम सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् ।
जराजन्म दुःखौघ तातप्यमानं 
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो।8।

# *भावार्थ* :
मैं  न तो योग जानता हूँ, न ही जप और न पूजा ही। हे शम्भो मैं तो सदा सर्वदा आपको ही नमस्कार करता हूँ। हे प्रभो ! बुढ़ापा और जन्म ( मृत्यु ) के दुःख समूहों से जलते हुए मुझ दुखी की दुखों से रक्षा कीजिये। हे ईश्वर ! हे शम्भो ! मैं आपको नमस्कार करता हूँ।
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                         हिन्दी शायरी दिल से 

Good evening

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