झुकी पलके हैं और होठों पर खामोशी है।
आँखें बता रही हैं
अभी मोहब्बत नई-नई है।
अभी न आएगी नींद तुमको,
अभी न हमको चैन आएगा
बेचैनी बता रही,
अभी बात नई नई है।
बहार का आज पहला दिन है,
चलो चमन में टहल के आए
फ़ज़ा में खुशबू नई नई है
गुलों में रंगत नई नई है।
जो खानदानी रईस हैं वो
मिजाज रखते हैं नर्म अपना,
तुम्हारा लहजा बता रहा है,
तुम्हारी दौलत नई-नई है।
ज़रा सा कुदरत ने क्या नवाज़ा
के आके बैठे हो पहली सफ़ में
अभी क्यों उड़ने लगे हवा में
अभी तो शोहरत नई नई है।