जय श्री राम

राम तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है 
कोई कवि बन जाए 
सहज संभाव्य है 
          मैथिलीशरण गुप्त 
साकेत अयोध्या का ही नाम है।
कवि मैथिली शरण गुप्त ने 
साकेत नाम से एक महाकाव्य की रचना की है।
जो नवीन दृष्टि से रामायण के सभी पात्रों को देखता और समझता है।
साकेत नायिका प्रधान काव्य है।
इसकी मुख्य नायिका लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला है
"तुम्हें जाना था तुम चले जाओ 
बस अपनी स्मृतियां हमें दे जाओ"

sad shayari

हम खामोश थे इसलिए बरसों निभ गई 
हम भी जुबान रखते 
तो 
कितना बबाल होते
हमने अच्छा होने की कोशिश कभी न की 
पर सच में खराब होते
तो
तो कितना बबाल होता
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ये तो सपना ही है कि 
I love you ❤️ कह दूंगा मैं 
तू निशाने पर भी आ जाए😷 तो कौन सा 
तीर मार लूंगा मैं 
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रोक लेना कुछ रिश्तों को हाथ से पकड़ के
वो जाते हैं फिर लौट कर नहीं आते 
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Romantic shayari chand ke sath


बड़ी हसरत से देखते हो चांद को
कोई वहां रहता है क्या
तुम्हें साथ देख कर मेरे 
तुमसे कुछ कहता है क्या 
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Good morning

इल्मो अदब के 
सारे खजाने गुजर गए...

क्या खूब थे वो लोग 
पुराने गुजर गए, 

बाकी है जमीं पे 
फकत आदमी की भीड़, 

इन्सां मरे हुए तो 
ज़माने गुजर गए...
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अब ये सोचूँ तो भँवर ज़ेहन में पड़ जाते हैं
कैसे चेहरे हैं जो मिलते ही बिछड़ जाते हैं

क्यूँ तेरे दर्द को दें तोहमत-इस हाल की 
ज़लज़लों में तो भरे शहर उजड़ जाते हैं

पतझड़ में इक दिल को बचाऊँ कैसे
ऐसी रुत में तो घने पेड़ भी झड़ जाते हैं

अब कोई क्या मेरे क़दमों के निशाँ ढूंढेगा 
तेज़ आँधी में तो ख़ेमे भी उखड़ जाते हैं


सोच का आइना धुँदला हो तो फिर वक़्त के साथ
चाँद चेहरों के भी अक्स।बिगड़ जाते हैं

शिद्दत-ए-ग़म में भी ज़िंदा हूँ तो हैरत कैसी
कुछ दिए तेज हवाओं से भी लड़ जाते हैं
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#शायरी

तेरी मौजूदगी में तेरी दुनिया कौन देखेगा
तुझे मेले में सब देखेंगे मेला कौन देखेगा

जहाँ होती रही है मुद्दतों संगीत की बारिश
वहाँ तन्हा खामोशी का बसेरा कौन देखेगा

जरा रूकिए अभी जाते हैं क्यों शादी की महफ़िल से
हसीं रात है  देखी , तो सवेरा कौन देखेगा

न ठप हो जाए तेरा कारोबार मय का ओ साक़ी
तेरी आँखों के होते जामों मीना कौन देखेगा

बहुत सुन्दर तेरा संसार ऐ संसार के मालिक
मगर जब सामने तू है तो सपना कौन देखेगा

अदाए मस्त से बेख़ुद न कीजे सारी महफ़िल को
तमाशाई न होंगे तो तमाशा कौन देखेगा

मुझे बाज़ार की ऊँचाई-नीचाई से क्या मतलब
तेरे सौदे में सस्ता और महँगा कौन देखेगा

Good night ,shayaripub.in

वो खुद सपना हो गए जो कल हमें दिखा रहे थे।
वो खुद वहां नहीं जाते,जहां हमें बुला रहे थे।
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बहुत हैं हम जिन्हें अपना प्यार समझते हैं।
वो हमें अपना आहार समझते हैं।।

Good morning,shayaripub.in

ज़िंदगी ऐसे ही नहीं संवरती है,,,,, 

कई सुख और दुःख की सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं,,,,,, 

तब जाकर खुशियों की छत नसीब होती है।
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Good morning,shayaripub.in

ये तलब , ये बेचैनियाँ
ये सारी की सारी रौनकें तुमसे  ही हैं ...

लोग कहते हैं इश्क जिसे मेरे हमदम 
 वो इश्क तुमसे  ही है।

Good morning,#shayaripub.in

मिलन, ख़्वाब, उल्फ़त या मुहब्बत से सजा मुझको
मेरे किरदार को तासीर दे…आ गुनगुना मुझको
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जय श्री राम

राम तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है  कोई कवि बन जाए  सहज संभाव्य है            मैथिलीशरण गुप्त  साकेत अयोध्या का ही नाम है। कवि मैथिली शरण ग...