तेरी मौजूदगी में तेरी दुनिया कौन देखेगा
तुझे मेले में सब देखेंगे मेला कौन देखेगा
जहाँ होती रही है मुद्दतों संगीत की बारिश
वहाँ तन्हा खामोशी का बसेरा कौन देखेगा
जरा रूकिए अभी जाते हैं क्यों शादी की महफ़िल से
हसीं रात है देखी , तो सवेरा कौन देखेगा
न ठप हो जाए तेरा कारोबार मय का ओ साक़ी
तेरी आँखों के होते जामों मीना कौन देखेगा
बहुत सुन्दर तेरा संसार ऐ संसार के मालिक
मगर जब सामने तू है तो सपना कौन देखेगा
अदाए मस्त से बेख़ुद न कीजे सारी महफ़िल को
तमाशाई न होंगे तो तमाशा कौन देखेगा
मुझे बाज़ार की ऊँचाई-नीचाई से क्या मतलब