Good morning

इल्मो अदब के 
सारे खजाने गुजर गए...

क्या खूब थे वो लोग 
पुराने गुजर गए, 

बाकी है जमीं पे 
फकत आदमी की भीड़, 

इन्सां मरे हुए तो 
ज़माने गुजर गए...
Shayaripub.in
अब ये सोचूँ तो भँवर ज़ेहन में पड़ जाते हैं
कैसे चेहरे हैं जो मिलते ही बिछड़ जाते हैं

क्यूँ तेरे दर्द को दें तोहमत-इस हाल की 
ज़लज़लों में तो भरे शहर उजड़ जाते हैं

पतझड़ में इक दिल को बचाऊँ कैसे
ऐसी रुत में तो घने पेड़ भी झड़ जाते हैं

अब कोई क्या मेरे क़दमों के निशाँ ढूंढेगा 
तेज़ आँधी में तो ख़ेमे भी उखड़ जाते हैं


सोच का आइना धुँदला हो तो फिर वक़्त के साथ
चाँद चेहरों के भी अक्स।बिगड़ जाते हैं

शिद्दत-ए-ग़म में भी ज़िंदा हूँ तो हैरत कैसी
कुछ दिए तेज हवाओं से भी लड़ जाते हैं
Shayaripub.in

#शायरी

तेरी मौजूदगी में तेरी दुनिया कौन देखेगा
तुझे मेले में सब देखेंगे मेला कौन देखेगा

जहाँ होती रही है मुद्दतों संगीत की बारिश
वहाँ तन्हा खामोशी का बसेरा कौन देखेगा

जरा रूकिए अभी जाते हैं क्यों शादी की महफ़िल से
हसीं रात है  देखी , तो सवेरा कौन देखेगा

न ठप हो जाए तेरा कारोबार मय का ओ साक़ी
तेरी आँखों के होते जामों मीना कौन देखेगा

बहुत सुन्दर तेरा संसार ऐ संसार के मालिक
मगर जब सामने तू है तो सपना कौन देखेगा

अदाए मस्त से बेख़ुद न कीजे सारी महफ़िल को
तमाशाई न होंगे तो तमाशा कौन देखेगा

मुझे बाज़ार की ऊँचाई-नीचाई से क्या मतलब
तेरे सौदे में सस्ता और महँगा कौन देखेगा

Good night ,shayaripub.in

वो खुद सपना हो गए जो कल हमें दिखा रहे थे।
वो खुद वहां नहीं जाते,जहां हमें बुला रहे थे।
           Shayaripub.in

shayaripub.in

बहुत हैं हम जिन्हें अपना प्यार समझते हैं।
वो हमें अपना आहार समझते हैं।।

Good morning,shayaripub.in

ज़िंदगी ऐसे ही नहीं संवरती है,,,,, 

कई सुख और दुःख की सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं,,,,,, 

तब जाकर खुशियों की छत नसीब होती है।
                Shayaripub.in

Good morning,shayaripub.in

ये तलब , ये बेचैनियाँ
ये सारी की सारी रौनकें तुमसे  ही हैं ...

लोग कहते हैं इश्क जिसे मेरे हमदम 
 वो इश्क तुमसे  ही है।

Good morning,#shayaripub.in

मिलन, ख़्वाब, उल्फ़त या मुहब्बत से सजा मुझको
मेरे किरदार को तासीर दे…आ गुनगुना मुझको
           Shayaripub.in

Good night

इतनी ठोकरे देने के लिए 
               शुक्रिया ए-ज़िन्दगी, 

चलने का न सही 
       सम्भलने का हुनर तो आ गया ।।
Shayaripub.in

Good evening

कौन समझेगा यहां की वीरानी देख के...

इस जगह भी ठहरे थे  कभी काफ़िले मोहब्बत के......
Shayaripub.in


पूछा जो उसने कैसे रहोगे ताउम्र तुम मेरे साथ..!!

तो हमने जमीं पर अपना साया दिखा दिया....!!!!
Shayaripub.in

good night

अंधेरे हैं तो कुछ दिये जला लिया करो
चाय पर दोस्तों को बुला लिया करो 
Shayaripub.in

जंगल में घूमते हिरन जैसी तुम
 सूरज की पहली किरण जैसी तुम

 दूर पहाड़ों से गिरते झरने जैसी तुम 
बारिश के बाद फूलों के संवरने जैसी तुम

 इटली के किसी पुराने शहर जैसी तुम
 रेगिस्तान में मीठी नहर जैसी तुम
                            अचला एस गुलेरिया 

Good morning

इल्मो अदब के  सारे खजाने गुजर गए... क्या खूब थे वो लोग  पुराने गुजर गए,  बाकी है जमीं पे  फकत आदमी की भीड़,  इन्सां मरे हुए तो  ज़माने गुजर गए...