shayari

न चाँद की चाहत न तारों की फरमाइश
हर पल में  तू  हो ! मेरे साथ बस यही है एक ख्वाहिश 
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मिलन, ख़्वाब, उल्फ़त या मुहब्बत से सजा मुझको मेरे किरदार को तासीर दे…आ गुनगुना मुझको            Shayaripub.in