उतार कर, चीख भी लेते हैं और आवाज़ भी नहीं होती ।
Shayari means "poetry" in english. But even after being synonymous to each other , both represent a very different depth to expression of the writer. Shayari is magical as it can mean different for every set of eyes that taste it through the sense of sight. It has no topic or a targeted demographic. It is made for everyone and everything. Though the great works in Shayari cannot be replicated but yes a new content based on our modern society can be created. The timelessness of shayari awaits.
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प्रेरणा से भरी हिंदी कविता
जीवन में एक वो पहर रखना
वह सब कुछ स्वयं ही करता है,
इस बात की यार खबर रखना
तुझे सही लगे या गलत लगे
बस दिल में यार सब्र रखना
मन में हर भाव रहे जिंदा
चुरा सागर से दिल में लहर रखना
जाने कब तन्हाई तन्हा कर दे
तू फोन में सारा शहर रखना
ना हाल सुनाना ना सुनना
नजरों में समझ की नजर रखना
जहां तुम हो और हो परमपिता
जीवन में एक वो पहर रखना
Jiwan mein ek wo pehar rakhna
wo savayum hi sub kuchh krta hai
is bat ki yaar khavr rkhna
tujhe sahi lage yaa galat lge
bus dil mein yaar saber rkhna
man mein har bhav rhe jinda
chura sagar se dil mein lahar rakhna
jane kab tanhai tanha kar de
tu phone mein sara shahar rkhna
na hal sunana na sun na
najron mein samjh ki najar rkhna
jahan tum ho aur ho parampita
jivan ek wo pehar rkhna
अचलाएसगुलेरिया
emotional shayari
दीदार न सही याद ही कर लिया कर,
हम नें कब कहा हमें हिचकियों से परहेज है.
ग़ज़ल
लड़ना खुद से,खुद को सिखाऊंगा
आज नहीं तो कल,मैं जीत जाऊंगा
कुछ रस्तों ने साथ नहीं दिया मेरा
मंजिल पर बैठ कर उन्हें चिढ़ाऊंगा
मैं मुश्किलों से डरने वाला नहीं हूँ
हर एक मुसीबत से भिड़ जाऊंगा
ज़माने ने हर बार ही गिराया है मुझे
अब मैं ज़माने को,उड़के दिखाऊंगा
तरस जाएंगे आँखों में आने को मेरी
आंसुओं को कुछ इस कदर सताऊंगा
🦋🦋Good Morning 🦋🦋
जीवन में प्रसन्न वही हैं 🦋🦋
जो अपना मूल्यांकन करते हैं,🦋🦋 और परेशान वो हैं जो दूसरों का मूल्यांकन करते हैं .
🦋🦋🦋🦋🦋🦋Shayaripub.com 🦋🦋🦋🦋🦋🦋
Good morning
“एक अरसे बाद हुई खुल के गुफ़्तगू उससे,
एक अरसे बाद वो चुभा हुआ काँटा निकला हो जैसे।”
दिलों को दिलो से मिलाते चलो!
,,,,,,,,,,,,,,,मुहब्बत के नगमें सुनाते चलो!!
अगर हो मुहब्बत किसी से कभी,
,,,,,,,,,,,,,,,,,,उसी से सदा तुम निभाते चलो !
दिलों में रहेगी मुहब्बत जवा,
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,वफा के सदा गीत गाते चलो!
न हो नफरतों का अधेरा कभी,
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,चरागे मुहब्बत जलाते चलो!
मिलेगी सफलता कभी ना कभी ,
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,हमेशा कदम को बढ़ाते चलो!
कभी भी दिलो में ना नफरत पले,
,,,,,,,,,,,,,,वतन के लिए जा लुटाते चलो!
हयात-ए सफर है घड़ी दो घड़ी,वफा रश्मे उल्फत निभाते चलो।
,,,Apka ये भरोसा सलामत रहे, यही बात सबको बताते चलो!
मैं प्रेम बन जाऊँ और तुम रूह की तलब
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,बस यूँ ही जी लेगे हम मोहब्बत बनकर ।
Romantic shayari
देढे मेढ़े ऊँचें नीचे रास्तों पर ....
किसी के साथ चलना चाहूँ तो तुम्हें ढूँढती हूँ,🌹
समेट कर रखती हूँ हसीन पल
कुछ जिंदगी के....
किसी के साथ बिताना चाहूँ
तो तुम्हें ढूँढती हूँ,🌹🌹
उड़ा ले जाती है नींदे जब उलझनें जीवन की
किसी के कांधे पर सर रख सोना चाहूँ
तो तुम्हें ढूंढती हूँ...🌹
छा जाते हैं बादल उदासियों के
जब पलकों पर ...
नमी में भी आँखों की
हँसना चाहूँ . ..
तो तुम्हें ढूंढती हूँ🌹🌹
कंपकंपाते होठों पर कभी,कलियाँ मुस्कान की,
सजाना चाहूँ तो तुम्हे ढूँढती हूँ....🌹
सुप्रभात
तकदीर और फकीर का कोई पता नहीं होता.!
कब क्या ले जाएं, और कब क्या दे जाएं..!!
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳
*💐💐प्रोफेसर की सीख💐💐*
प्रोफ़ेसर साहब बड़े दिनों बाद आज शाम को घर लौटते वक़्त अपने दोस्त नवीन से मिलने उसकी दुकान पर गए।
इतने दिनों बाद मिल रहे दोस्तों का उत्साह देखने लायक था…दोनों ने एक दुसरे को गले लगाया और बैठ कर गप्पें मारने लगे।
चाय-वाय पीने के कुछ देर बाद प्रोफ़ेसर बोले, “यार एक बात बता, पहले मैं जब भी आता था तो तेरी दुकान में ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी और हम बड़ी मुश्किल से बात कर पाते थे। लेकिन आज बस इक्का-दुक्का ग्राहक ही दिख रहे हैं और तेरा स्टाफ भी पहले से कम हो गया है…”
दोस्त मजाकिया लहजे में बोला, “अरे कुछ नहीं, हम इस मार्केट के पुराने खिलाड़ी हैं…आज धंधा ढीला है…कल फिर जोर पकड़ लेगा!”
इस पर प्रोफ़ेसर साहब कुछ गंभीर होते हुए बोले, “देख भाई, चीजों को इतना हलके में मत ले…मैं देख रहा हूँ कि इसी रोड पर कपड़े की तीन-चार और दुकाने खुल गयी हैं, कम्पटीशन बहुत बढ़ गया है…और ऊपर से…”
प्रोफ़ेसर साहब अपनी बात पूरी करते उससे पहले ही, दोस्त उनकी बात काटते हुए बोला, “अरे ये दुकाने आती-जाती रहती हैं, इनसे कुछ फरक नहीं पड़ता।”
प्रोफ़ेसर साहब कॉलेज टाइम से ही अपने दोस्त को जानते थे और वो समझ गए कि ऐसे समझाने पर वो उनकी बात नहीं समझेगा।
इसके बाद उन्होंने अगले रविवार, बंदी के दिन; दोस्त को चाय पे बुलाया।
दोस्त, तय समय पर उनके घर पहुँच गया।
कुछ गपशप के बाद प्रोफ़ेसर साहब उसे अपने घर में बनी एक प्राइवेट लैब में ले गए और बोले, “देख यार! आज मैं तुझे एक बड़ा ही इंटरस्टिंग एक्सपेरिमेंट दिखता हूँ..”
प्रोफ़ेसर साहब ने एक जार में गरम पानी लिया और उसमे एक मेंढक डाल दिया। पानी से सम्पर्क में आते ही मेंढक खतरा भांप गया और कूद कर बाहर भाग गया।
इसके बाद प्रोफ़ेसर साहब ने जार से गरम पानी फेंक कर उसमे ठंडा पानी भर दिया, और एक बार फिर मेंढक को उसमे डाल दिया। इस बार मेंढक आराम से उसमे तैरने लगा।
तभी प्रोफ़ेसर साहब ने एक अजीब सा काम किया, उन्होंने जार उठा कर एक गैस बर्नर पर रख दिया और बड़ी ही धीमी आंच पर पानी गरम करने लगे।
कुछ ही देर में पानी गरम होने लगा। मेंढक को ये बात कुछ अजीब लगी पर उसने खुद को इस तापमान के हिसाब से एडजस्ट कर लिया…इस बीच बर्नर जलता रहा और पानी और भी गरम होता गया….पर हर बार मेढक पानी के टेम्परेचर के हिसाब से खुद को एडजस्ट कर लेता और आराम से पड़ा रहता….लेकिन उसकी भी सहने की एक क्षमता थी! जब पानी काफी गरम हो गया और खौलने को आया तब मेंढक को अपनी जान पर मंडराते खतरे का आभास हुआ…और उसने पूरी ताकत से बाहर छलांग लगाने की कोशिष की….पर बार-बार खुद को बदलते तापमान में ढालने में उसकी काफी उर्जा लग चुकी थी और अब खुद को बचाने के लिए न ही उसके पास शक्ति थी और न ही समय…देखते-देखते पानी उबलने लगा और मेंढक की मौत हो गयी।
एक्सपेरिमेंट देखने के बाद दोस्त बोला-
यार तूने तो मेंढक की जान ही ले ली…खैर, ये सब तू मुझे क्यों दिखा रहा है?
प्रोफ़ेसर बोले, “ मेंढक की जान मैंने नहीं ली…उसने खुद अपनी जान ली है। अगर वो बिगड़ते हुए माहौल में बार-बार खुद को एडजस्ट नहीं करता बल्कि उससे बचने का कुछ उपाय सोचता तो वो आसानी से अपनी जान बचा सकता था। और ये सब मैं तुझे इसलिए दिखा रहा हूँ क्योंकि कहीं न कहीं तू भी इस मेढक की तरह व्यवहार कर रहा है।
तेरा अच्छा-ख़ासा बिजनेस है पर तू चेंज हो रही मार्केट कंडीशनस की तरफ ध्यान नहीं दे रहा, और बस ये सोच कर एडजस्ट करता जा रहा है कि आगे सब अपने आप ठीक हो जाएगा…पर याद रख अगर तू आज ही हो रहे बदलाव के ऐकौर्डिंग खुद को नहीं चेंज करेगा तो हो सकता है इस मेंढक की तरह कल को संभलने के लिए तेरे पास ना एनर्जी हो और ना ही समय!”
प्रोफ़ेसर की सीख ने दोस्त की आँखें खोल दीं, उसने प्रोफ़ेसर साहब को गले लगा लिया और वादा किया कि एक बार फिर वो मार्केट लीडर बन कर दिखायेगा।
*💐💐शिक्षा💐💐*
दोस्तों, प्रोफ़ेसर साहब के उस दोस्त की तरह बहुत से लोग अपने आस-पास हो रहे बदलाव की तरफ ध्यान नहीं देते। लोग जिन skills के कारण नोकरी के लिए चुने जाते हैं बस उसी पर अटके रहते हैं खुद को update नहीं करते…और जब company में layoffs होते हैं तो उन्हें ही सबसे पहले निकाला जाता है…लोग जिस ढर्रे पर 10 साल पहले व्यवसाय कर रहे होते हैं बस उसी को पकड़कर बैठे रहते हैं और देखते-देखते नए खिलाड़ी सारा बाजार कवर कर लेते हैं!
यदि आप भी खुद को ऐसे लोगों से सम्बंधित कर पा रहे हैं तो संभल जाइए और इस कहानी से सीख लेते हुए मजबूत बनिए और आस-पास हो रहे बदलावों के प्रति सतर्क रहिये, ताकि बदलाव की बड़ी से बड़ी आंधी भी आपकी जड़ों की हिला न पाएं!
Om namo shivay, Goodmorning
🌹तालाब सदा कुएँ से सैंकड़ों गुना बड़ा होता है,फिर भी तुम कुएँ का ही पानी पीते हो,क्योंकि कुएँ में गहराई और शुद्धता है,और जहाँ गहराई है,वहीं पर शुद्ध प्रेम है…🌹
🙏शुभ प्रभात🙏
hare krishna
अंत का भी अंत होता है कुछ भी कहाँ अनंत होता है पतझड़ भी एक घटना है
बारह महीने कहाँ बसंत होता है !!
प्रेम भरी हिंदी कविता
तेरी सूरत के आगे क्या दर्पण करें ....
प्रेम के सिवा तुझे क्या अर्पण करें.....
जिंदगी सौंप दी है तुझको प्यार में ...
इससे ज्यादा तुम्हें क्या समर्पण करें..
emotional shayari ,good morning
बहुत चाहा उसको जिसे हम पा न सके,
ख्यालों में किसी और को ला न सके....
उसको देख के आंसू तो पोंछ लिए,
लेकिन किसी और को देख के मुस्कुरा न सके..
Good morning
आपको मैंने निगाहों में बसा रखा है,
आईना छोड़िए,आईने में क्या रखा है_!!
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मेरे तुम्हारे बीच कुछ नहीं
सिर्फ एहसास , कुछ संवाद
कुछ आधी , अधूरी बातें
और कहने को कुछ नहीं
सिर्फ फिक्र, एक दूजे की
और कुछ नहीं..
न कभी तुमने कुछ कहा
न मैंने कुछ सुना..
फिर भी वो एहसास बिन कहे
सुन लेने का..महज कहने की बात है
एक दूजे के साथ लिए दूर होकर भी
इतने करीब होना.. मीठा सा एहसास
छू जाता है दिल को, यही बंधन मुझे
मुक्त नहीं करा पाया तुझसे...🌹
Dil se likhi baten
मैं दरगाह-ए-इश्क़ में हर रोज़ सजदा करता हूँ तेरा..
कि मुझे जन्नत-ए-दिल में अपनी, तू पनाह दे ज़रा....
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हिम्मत मत खोना अभी बहुत आगे जाना है जिन्होंने कहा था तेरे बस का नहीं है उनको भी करके दिखाना है Shayaripub.in
