Dil se likhi baten

मैं दरगाह-ए-इश्क़ में हर रोज़ सजदा करता हूँ तेरा..

कि मुझे जन्नत-ए-दिल में अपनी, तू पनाह दे ज़रा....
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भरोसा और आशीर्वाद  कभी दिखते नहीं.. लेकिन  नामुमकिन को मुमकिन बना देते हैं                      🌹*सुप्रभात*🌹.                       Shayar...