क्यूं ? हिन्दी कविता

यह तेरा शहर उदास इतना भी क्यों है ?
जिसे देखे  हुए जमाना गुजर गया
वह पास इतना भी क्यों है ?

रात भर सितारों से भरा रहता है जो!
दिन में यह खाली पड़ा
आकाश इतना भी क्यूँ है ?

तेरे इत्र से महकता रहता है घर मेरा
तेरे ना होने से भी तेरे होने का
एहसास इतना भी क्यों है?

उसकी बात करें या उससे बात करें
हर बात में कोई शख्स
खास इतना भी क्यों है? 
                   अचला एस गुलेरिया
                      Shayaripub.in

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