Good morning

सफलता की ऊँचाई पर
संतुलन और धीरज ज़रूरी है
आकाश कितना ही ऊँचा हो
बैठने की जगह किसी को नहीं देता 
           Shayaripub.in
        

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Good evening

कौन समझेगा यहां की वीरानी देख के... इस जगह भी ठहरे थे  कभी काफ़िले मोहब्बत के...... Shayaripub.in पूछा जो उसने कैसे रहोगे ताउम्र तुम मेरे सा...