Good morning

यूँ तो रोज़ आते हैं,...सेंकडों परिंदे मेरी मुडेर पर।
पर किसी के भी पंजों में,,,,,तेरी चिठ्ठी कहाँ होती है...
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Good night

इतनी ठोकरे देने के लिए                 शुक्रिया ए-ज़िन्दगी,  चलने का न सही         सम्भलने का हुनर तो आ गया ।। Shayaripub.in