प्रेम prem,love

पावन नेह सदा ध्रुवनंदा सा बहेगा
जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा

अग्रज वंदना "र"कर रहा है।
देखो बड़ों को नमन कर रहा है।।
छोटों को अंक में "प"भर रहा है
परस्पर स्नेह यह शाश्वत रहेगा ।।
जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा

कर्म पथ की ऊंची डगर पर चला है ।
"ए "देखो गौरव से कैसे खड़ा है ।।
अकेले खड़े रहना अपनों की खातिर
हम सब को यह सिखाता रहेगा।।
जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा

ममता मां मरम जिसमें छुपे हैं ।
मान ,नियम ,जिसके आगे झुके हैं।।
संयोग वियोग के भावजगत में
प्रणय को" म"ही सुभाषित करेगा ।।
जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा



प्रकृति की यह प्रिय सन्नतति है
सम्पूर्ण विश्व इसकी सहज उत्पत्ति है
मानवीय संस्कार सबको सिखा कर
भावों के नूतन रंग भरेगा।।
जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा ।।

जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा
                        अचला एस गुलेरिया




 नेह सदा ध्रुवनंदा सा बहेगा
 जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा 

अग्रज वंदना "र"कर रहा है।
देखो बड़ों को नमन कर रहा है।।
 छोटों को अंक में "प"भर रहा है
 परस्पर स्नेह  यह शाश्वत रहेगा ।।
जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा 

कर्म पथ की ऊंची डगर पर चला है ।
"ए "देखो गौरव से कैसे खड़ा है ।।
 अकेले खड़े रहना अपनों की खातिर
 हम सब को यह सिखाता रहेगा।।
जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा 

 ममता  मां मरम जिसमें छुपे हैं ।
मान ,नियम ,जिसके आगे झुके हैं।।
संयोग वियोग के भावजगत में
 प्रणय को" म"ही सुभाषित करेगा ।।
जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा 


 
प्रकृति की यह प्रिय सन्नतति है 
सम्पूर्ण विश्व इसकी सहज उत्पत्ति है 
 मानवीय संस्कार सबको सिखा कर
 भावों के नूतन रंग भरेगा।।
जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा ।।

जगत में प्रेम अपरिभाषित रहेगा  
                                       अचला एस गुलेरिया


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                     हिन्दी शायरी दिल से 

2 टिप्‍पणियां:

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