जो नजर से गिरे थे ,दिल से उतरने लगे हैं।।
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दिल कांच से भी नाजुक है अपना
टूट के बिखरा तो समझने लगे हैं।।
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फितरत में जिनकी बेईमानियां हैं
मोहब्बत उन्हें हम तो करने लगे हैं ।।
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वह तोडेंगे दिल फिर से टुकड़े करेंगे ,
यही सोच कर कुछ डरने लगे हैं ।।
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इस दिल के चमन में सन्नाटा था पसरा
मुद्दतों बाद पंछी चहकने लगे हैं ।।
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पता चल गया है अब सुकून में हम हैं
दुश्मन गली में टहलने लगे हैं ।।
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शायद रुतबा ऊंचा हुआ है
मुझे बेगाने भी अपना कहने लगे हैं ।।
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खबर मिली है जहां से जाना है एक दिन
तैयारी अभी से करने लगे हैं ।।
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हम भी बहुत आगे जाएंगे साहब
कही बातों से हम मुकरने लगे हैं
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कहीं बातों से हम मुकरने लगे हैं।।
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🌹हिन्दी शायरी दिल से 🌹
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