Good morning

कैसे बनायें तेरी यादों से दूरियाँ,

दो कदम जाकर सौ कदम लौट आते हैं !!
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लहरों में डूबते रहे , दरिया नहीं मिला
उससे बिछड़ के फ़िर कोई वैसा नहीं मिला   

वो भी बहुत अकेला है , शायद मेरी तरह  
उसका भी कोई चाहने वाला नहीं मिला 

साहिल पे कितने लोग मेरे साथ-साथ थे  
तूफ़ान की ज़द में आया , तो तिनका नहीं मिला   

दो-चार दिन तो कितने सुकून से गुज़र गए  
सब खैरियत रही , कोई अपना नहीं मिला 


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Good morning

इल्मो अदब के  सारे खजाने गुजर गए... क्या खूब थे वो लोग  पुराने गुजर गए,  बाकी है जमीं पे  फकत आदमी की भीड़,  इन्सां मरे हुए तो  ज़माने गुजर गए...