शुभ नवरात्रि

या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
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ये रहस्य केवल रेलगाड़ियाँ जानती हैं...   किस तन का टिकट कहाँ का था....   और कौनसा मन... कौनसे स्टेशन पर‌ उतर गया.