Good morning

इतिहास में कहाँ दर्ज़ होते हैं 
          वो युद्ध, 
जो मन के भीतर चलते हैं I
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मस्ती भरी शायरी

न छत है यहां न हक में हवाऐं...... ​​है कश्ती भी जर्जर..ये कैसा सफर है...​​., अलग ही मजा है..फ़कीरी का अपना.... न पाने की चिंता.....