समय बदलता है करवटें रोज ही
हर रात पूर्णमाशी की रात नहीं होती है |
किसी को खो कर.. सिर्फ उसे ही
चाहते रहना,
हर किसी के बस में यह बात नहीं होती है |
SAMAY BADLTA HAI KARVTEN ROJ HI
HAR RAT PURANMASHI KI RAT NHI HOTI HAI.
KISI KO KHO KER SIRF USSE HI
CHAHTE REHNA,HAR KISI KE BUS KI
BAT NHIN HOTI HAI.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें