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बेड़ियाँ डाल के ,उम्मीद न कर पायल की,
दर्द के  रक्स में ,घुँघरू नहीं ख़नकते हैं  !
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Good night

इतनी ठोकरे देने के लिए                 शुक्रिया ए-ज़िन्दगी,  चलने का न सही         सम्भलने का हुनर तो आ गया ।। Shayaripub.in