GOOD MORNING


इश्क न सही फिक्र है
तू न सही  तेरा ज़िक्र है
चाहत क्या बंधे सीमा में
ये  तो  फिजाओं में फैला इत्र है
इश्क ना सही फिक्र है 
तू न सही तेरा जिक्र है..
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