जिंदगी की प्रयोगशाला में प्रयोग चलते रहते हैं
उन पर कितने रंग चढ़ते उतरते रहते हैं
हम अपना हक भी हक से मांगते नहीं
और वह नाजायज हड़प के भी अकड़ते रहते हैं
हिसाब रखता है वह हर एक कर्म का
इसलिए रब से सब डरते रहते हैं
इसलिए उस रब से सब डरते रहते हैं
JINDAGI KI PERYOGSHALA MEIN
PARYOG CHALTE REHTE HAIN
UN PER KITNE RANG CHADTE UTARTE REHTE HAIN
HUM APNA HQ BHI HQ SE MANGTE NHI
AUR BEH NAJAYAJ HADAP KE BHI AKRATE REHTE HAIN
HISAB RAKHTA HAI BEH HAR KARM KA
ISLIYE RUB SE SUB DARTE REHTE HAIN
ISLIYE USE RUB SE SUB DARTE REHTE HAIN
अचला एस गुलेरिया
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