कर्म भूमि है दुनियां
श्रम सभी को करना है…
भगवान सिर्फ लकीरें देता है,
रंग हमें ही भरना है..
karam bhumi hai duniyan
sharm sabhi ko krna hai
bhagwan sirf lakeeren deta hai
rang hmen hi bharna hai
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अहंकार तब उत्पन्न होता है जब
हम यह भूल जाते हैं कि प्रशंसा हमारे
गुणों की हो रही है हमारी नहीं।
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इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है।
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