सुबह सबेरे वाली शायरी

घर के बाहर बहुत अंधेरा है;
आओं भीतर शमा जलाएं हम।

आशिकी बेखुदी नहीं यारो;
प्यार को बन्दगी बनाएं हम।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

emotional 💕 shayari

ये रहस्य केवल रेलगाड़ियाँ जानती हैं...   किस तन का टिकट कहाँ का था....   और कौनसा मन... कौनसे स्टेशन पर‌ उतर गया.