सुबह सबेरे वाली शायरी

घर के बाहर बहुत अंधेरा है;
आओं भीतर शमा जलाएं हम।

आशिकी बेखुदी नहीं यारो;
प्यार को बन्दगी बनाएं हम।

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सुबह सबेरे वाली शायरी

घर के बाहर बहुत अंधेरा है; आओं भीतर शमा जलाएं हम। आशिकी बेखुदी नहीं यारो; प्यार को बन्दगी बनाएं हम।