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चाय हो या रिश्ता

 दोनों में स्वाद
मायने रखता है 

रंग नही....

खुद में झाँकने के लिए जिगर चाहिए,
         दूसरों की बुराई बताने में तो 
               हर शख्स माहिर है..


किसी से रुठो
तो संभलकर,
रुठना
आजकल मनाने का
नहीं छोड़ देने का
रिवाज है...




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