हमारी कलम में तो
प्रेम और दर्द साथ साथ चलते है
सुन हमको समझाने वाले,क्यों यह तेरी समझ ना आए।
पल भर चैन ना पाने वाला
पल भर चैन ना पाने वाला
कैसे अपने जख्म छुपाए
उसूल-ए-मुहब्बत..... तो यही कहती
है कि...
एक ही शख़्स पे दास्तां....... ख़त्म
की जाए..
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