जरा जरा सी बात पर मेरे अपने रूठ जाते हैं
खामोश पड़े कुछ रिश्ते धीरे से टूट जाते हैं ।
जिम्मेवारियां का बोझ झुका देता है कांधे भी
मगर ये बोझ हटता है तो काँधे टूट जाते हैं।
दिल टूटा तो ही समझ आया वरना
मैं अक्सर सोचता था लोग कैसे टूट जाते हैं।
सलीक़े से अगर तोड़ें तो काँटे टूट जाते है
मगर अफ़्सोस ये है फूल पहले टूट जाते है।
इतिहास गवाह है इस बात का
मोहब्बत जब सदा देती है तो,पिंजरे टूट जाते हैं।
ज्यादा कामयाबी भी अच्छी नहीं साहिब
फलों का बोझ बढ़ने से भी पौधे टूट जाते हैं।
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