attitude shayari

तुमने समझा ही नहीं ....
  और ना समझना चाहा
हम चाहते ही क्या थे ?तुमसे !!

 ❤तुम्हारे सिवा❤
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emotional shayari ,shayari

न चाँद की चाहत न तारों की फरमाइश
हर पल में  तू  हो ! मेरे साथ बस यही है एक ख्वाहिश 
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attitude shayari

                 जिस दिन भी 
          तुम्हारा इश्क़ नीलाम होगा न!!! 
जायजाद ए मुहब्बत पे हमारा ही नाम होगा 
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गणेश स्तुति

 गणपति गणपति गणपति गणपति 
गणपति गणपति पालयमाम ।। 
गणपति गुणपति गजपति ममपति
 वरपति सुरपति पलायमाम।।
 गणपति बाल गणपति गंभीर गणपति ज्ञान
 गणपति नर्तन गणपति गणपति गणपति 
गणपति गणपति गणपति  पालयमाम। ।
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अबोध गणेश जी के बाल्यपन से प्रभावित होकर भगवान शंकर के सुंदर रूप को देखकर पुनः उसी रूप में आने का अनुरोध ।येक अलौकिक ब्रतांत
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एक बार गणेशजी ने भगवान शिवजी से कहा: पिताजी आप यह चिताभस्म लगाकर, मुण्डमाला धारणकर अच्छे नहीं लगते। मेरी माता गौरी अपूर्व सुंदरी और आप उनके साथ इस भयंकर रूप में!*

*पिताजी, आप एक बार कृपा करके अपने सुंदर रूप में माता के सम्मुख आएं जिससे हम आपका असली स्वरूप देख सकें।*

( *भगवान शिवजी मुस्कुराये और गणेशजी की बात मान ली।*)

*कुछ समय बाद जब शिवजी स्नान करके लौटे तो उनके शरीर पर भस्म नहीं थी। बिखरी जटाएं सँवरी हुई, मुण्डमाला उतरी हुई थी।*

*सभी देवता, यक्ष, गंधर्व, शिवगण उन्हें अपलक देखते रह गये। वो ऐसा रूप था कि मोहिनी अवतार रूप भी उसके सामने फीका पड़ जाये।*

*भगवान शिव ने अपना यह रूप कभी भी प्रकट नहीं किया था। शिवजी का ऐसा अतुलनीय रूप करोड़ों कामदेव को भी मलिन कर रहा था।*

*गणेशजी अपने पिता की इस मनमोहक छवि को देखकर स्तब्ध रह गए और मस्तक झुकाकर बोले: मुझे क्षमा करें पिताजी, परन्तु अब आप अपने पूर्व स्वरूप को धारण कर लीजिए।*

*भगवान शिव मुस्कुराये और पूछा: क्यों पुत्र अभी तो तुमने ही मुझे इस रूप में देखने की इच्छा प्रकट की थी, अब पुनः पूर्व स्वरूप में आने की बात क्यों?*

*गणेशजी ने मस्तक झुकाये हुए ही कहा: क्षमा करें पिताश्री, मेरी माता से सुंदर कोई और दिखे मैं ऐसा कदापि नहीं चाहता।*

( *शिवजी हँसे और अपने पुराने स्वरूप में लौट आये।*)

_*पौराणिक ऋषि इस प्रसंग का सार स्पष्ट करते हुए कहते हैं की: आज भी ऐसा ही होता है। पिता रुद्र रूप में रहता है क्योंकि उसके ऊपर परिवार की जिम्मेदारियों, परिवार के रक्षण और उनके मान सम्मान की जिम्मेदारी होती है तो थोड़ा कठोर बनना पड़ता है।*_

_*और माँ सौम्य, प्यार, लाड़, स्नेह देकर उस कठोरता का बैलेंस बनाती है। इसलिए सुंदर होता है माँ का स्वरूप।*_

_*पिता के ऊपर से भी यदि जिम्मेदारियों का बोझ हट जाए तो वो भी बहुत सुंदर दिखता है।*_
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sad shayari

*वो किसी की कई जन्मों की मन्नत होगी,*
*वो ऐसे कैसे मिल जाती मुझे।*
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हरे कृष्ण



         *सुख भी मुझे प्यारे है,*
             *दुःख भी प्यारे है*

             *छोड़ू मैं किसे..*
                    *प्रभु..*  
          *दोनों ही तुम्हारे है*
       *सुख में तेरा शुक्र करू,* 
        *दुःख में फ़रियाद करूँ*

      *जिस हाल में तू रखे मुझे,*
           *मैं तुम्हे याद करू ।।* 
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emotional shayari

सहमी-सहमी हुई रहती हैं!
मकाने दिल में
 तमन्नाएं भी ग़रीबों की तरह होती हैं .
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inspirational thoughts

*पूजापाठ से जुड़ी हुईं महत्वपूर्ण बातें*

★ एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए।

★ सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए। 

★ बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छूकर प्रणाम करें। 

★ जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं। इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं।

★ जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए। 

★ जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए।

★ संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सन्ध्या के समय तुलसी तोड़ना निषिद्ध हैं।

★ दीपक से दीपक को नही जलाना चाहिए।

★ यज्ञ, श्राद्ध आदि में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए, सफेद तिल का नहीं। 

★ शनिवार को पीपल पर जल चढ़ाना चाहिए। पीपल की सात परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा करना श्रेष्ठ है, 

★ कूमड़ा-मतीरा-नारियल आदि को स्त्रियां नहीं तोड़े या चाकू आदि से नहीं काटें। यह उत्तम नही माना गया हैं। 

★ भोजन प्रसाद को लाघंना नहीं चाहिए।

★  देव प्रतिमा देखकर अवश्य प्रणाम करें।

★  किसी को भी कोई वस्तु या दान-दक्षिणा दाहिने हाथ से देना चाहिए।

★  एकादशी, अमावस्या, कृृष्ण चतुर्दशी, पूर्णिमा व्रत तथा श्राद्ध के दिन क्षौर-कर्म (दाढ़ी) नहीं बनाना चाहिए ।

★ बिना यज्ञोपवित या शिखा बंधन के जो भी कार्य, कर्म किया जाता है, वह निष्फल हो जाता हैं।

★ शंकर जी को बिल्वपत्र, विष्णु जी को तुलसी, गणेश जी को दूर्वा, लक्ष्मी जी को कमल प्रिय हैं।

★ शंकर जी को शिवरात्रि के सिवाय कुमकुम नहीं चढ़ती।

★ शिवजी को कुंद, विष्णु जी को धतूरा, देवी जी  को आक तथा मदार और सूर्य भगवानको तगर के फूल नहीं चढ़ावे।

★ अक्षत देवताओं को तीन बार तथा पितरों को एक बार धोकर चढ़ावे।

★ नये बिल्व पत्र नहीं मिले तो चढ़ाये हुए बिल्व पत्र धोकर फिर चढ़ाए जा सकते हैं।

★ विष्णु भगवान को चावल गणेश जी  को तुलसी, दुर्गा जी और सूर्य नारायण  को बिल्व पत्र नहीं चढ़ावें।

★ पत्र-पुष्प-फल का मुख नीचे करके नहीं चढ़ावें, जैसे उत्पन्न होते हों वैसे ही चढ़ावें।

★ किंतु बिल्वपत्र उलटा करके डंडी तोड़कर शंकर पर चढ़ावें। 

★पान की डंडी का अग्रभाग तोड़कर चढ़ावें।

★ सड़ा हुआ पान या पुष्प नहीं चढ़ावे।

★ गणेश को तुलसी भाद्र शुक्ल चतुर्थी को चढ़ती हैं।

★ पांच रात्रि तक कमल का फूल बासी नहीं होता है।

★ दस रात्रि तक तुलसी पत्र बासी नहीं होते हैं।

★ सभी धार्मिक कार्यो में पत्नी को दाहिने भाग में बिठाकर धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न करनी चाहिए।

★ पूजन करनेवाला ललाट पर तिलक लगाकर ही पूजा करें।

★ पूर्वाभिमुख बैठकर अपने बांयी ओर घंटा, धूप तथा दाहिनी ओर शंख, जलपात्र एवं पूजन सामग्री रखें।

★ घी का दीपक अपने बांयी ओर तथा देवता को दाहिने ओर रखें एवं चांवल पर दीपक रखकर प्रज्वलित करें। 

★ गणेशजी को तुलसी का पत्र छोड़कर सब पत्र प्रिय हैं।  भैरव की पूजा में तुलसी स्वीकार्य नहीं है। 

★ कुंद का पुष्प शिव को माघ महीने को छोड़कर निषेध है। 
 
★ बिना स्नान किये जो तुलसी पत्र जो तोड़ता है उसे देवता स्वीकार नहीं करते। 

★ रविवार को दूर्वा नहीं तोड़नी चाहिए। 
 
★ केतकी पुष्प शिव को नहीं चढ़ाना चाहिए। 
 
★ केतकी पुष्प से कार्तिक माह में विष्णु की पूजा अवश्य करें। 
 
★ देवताओं के सामने प्रज्जवलित दीप को बुझाना नहीं चाहिए। 

★ शालिग्राम का आवाह्न तथा विसर्जन नहीं होता। 
 
★ जो मूर्ति स्थापित हो उसमें आवाहन और विसर्जन नहीं होता। 
 
★ तुलसीपत्र को मध्यान्ह के बाद ग्रहण न करें। 
 
★ पूजा करते समय यदि गुरुदेव,ज्येष्ठ व्यक्ति या पूज्य व्यक्ति आ जाए तो उनको उठ कर प्रणाम कर उनकी आज्ञा से शेष कर्म को समाप्त करें। 
 
★ मिट्टी की मूर्ति का आवाहन और विसर्जन होता है और अंत में शास्त्रीयविधि से गंगा प्रवाह भी किया जाता है। 
 
★ कमल को पांच रात,बिल्वपत्र को दस रात और तुलसी को ग्यारह रात बाद शुद्ध करके पूजन के कार्य में लिया जा सकता है। 

 ★ पंचामृत में यदि सब वस्तु प्राप्त न हो सके तो केवल दुग्ध से स्नान कराने मात्र से पंचामृतजन्य फल जाता है। 
 
★ शालिग्राम पर अक्षत नहीं चढ़ता। लाल रंग मिश्रित चावल चढ़ाया जा सकता है। 
 
★ हाथ में धारण किये पुष्प, तांबे के पात्र में चन्दन और चर्म पात्र में गंगाजल अपवित्र हो जाते हैं। 
 
★ पिघला हुआ घी और पतला चन्दन नहीं चढ़ाना चाहिए। 
 
★ प्रतिदिन की पूजा में सफलता के लिए दक्षिणा अवश्य चढ़ाएं। 
 
★ आसन, शयन, दान, भोजन, वस्त्र संग्रह, विवाद और विवाह के समयों पर छींक शुभ मानी गई है।  
 
★ जो मलिन वस्त्र पहनकर, मूषक आदि के काटे वस्त्र, केशादि बाल कर्तन युक्त और मुख दुर्गन्ध युक्त हो, जप आदि करता है उसे देवता नाश कर देते हैं। 
 
★ मिट्टी, गोबर को निशा में और प्रदोषकाल में गोमूत्र को ग्रहण न करें। 
 
★ मूर्ति स्नान में मूर्ति को अंगूठे से न रगड़ें।
 
★ पीपल को नित्य नमस्कार पूर्वाह्न के पश्चात् दोपहर में ही करना चाहिए। इसके बाद न करें।  
 
★ जहां अपूज्यों की पूजा होती है और विद्वानों का अनादर होता है, उस स्थान पर दुर्भिक्ष, मरण और भय उत्पन्न होता है। 
 
★ पौष मास की शुक्ल दशमी तिथि, चैत्र की शुक्ल पंचमी और श्रावण की पूर्णिमा तिथि को लक्ष्मी प्राप्ति के लिए लक्ष्मी का पूजन करें। 
 
★ कृष्णपक्ष में, रिक्तिका तिथि में, श्रवणादी नक्षत्र में लक्ष्मी की पूजा न करें। 
 
★ अपराह्नकाल में, रात्रि में, कृष्ण पक्ष में, द्वादशी तिथि में और अष्टमी को लक्ष्मी का पूजन प्रारम्भ न करें। 
 
★ मंडप के नव भाग होते हैं, वे सब बराबर-बराबर के होते हैं अर्थात् मंडप सब तरफ से चतुरासन होता है, अर्थात् टेढ़ा नहीं होता। जिस कुंड की श्रृंगार द्वारा रचना नहीं होती वह यजमान का नाश करता है। 

★ पूजा-पाठ करते समय हो जाए कुछ गलती तो अंत में जरूर बोलें ये एक मंत्र

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन।
यत्पूजितं मया देव! परिपूर्ण तदस्तु मे॥

आप सभी को निवेदन है अगर हो सके तो और लोगों को भी आप इन महत्वपूर्ण बातों से अवगत करा सकते है।।


*"सुन लेने से..."*
*कितने सारे सवाल सुलझ जाते हैं...,*


*"सुना देने से..."*
*हम फिर से वहीं उलझ जाते हैं...!*
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                 ।।।।।।।।हिन्दी शायरी दिल से ।।।।।।।।।।



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❤*प्रेम से रहो दोस्तो जरा सी बात पर रुठा नही करते,*❤

❤*पत्ते वही सुन्दर दिखते हैं जो शाख से टूटा नहीं करते....!!*
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*हजार बंदिशें हो मोहब्बत झुक नहीं सकती,*

*वो बहती धारा है कहीं भी रुक नहीं सकती....
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स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 2021#

 स्वतंत्रता  विचार की
 स्वतंत्रता व्यवहार की 
जाने कैसे बन गई !!!
स्वतंत्रता दुर्व्यवहार की।।
 भारत मां के पूत तुम
 संस्कारवान सपूत तुम 
संसद में दे रहे हो !!
किस संस्कार का सबूत तुम।।
 आमजन कमा रहा 
टैक्स हर चुका रहा 
कौन है जो ???देश को
 कुर्सी पर जमकर खा रहा ।। 
 अतिस्वतंत्रतापर अनुशासन की लगाम हो 
देश की हर संस्था में अनुशासित हर काम हो
 स्वतंत्रता दिवस पर यही हमारी  कामना ....
विश्व के पटल पर ऊंचा भारत का नाम हो।।
                         अचला एस गुलेरिया
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Good evening

कौन समझेगा यहां की वीरानी देख के... इस जगह भी ठहरे थे  कभी काफ़िले मोहब्बत के...... Shayaripub.in पूछा जो उसने कैसे रहोगे ताउम्र तुम मेरे सा...