Shayari means "poetry" in english. But even after being synonymous to each other , both represent a very different depth to expression of the writer. Shayari is magical as it can mean different for every set of eyes that taste it through the sense of sight. It has no topic or a targeted demographic. It is made for everyone and everything. Though the great works in Shayari cannot be replicated but yes a new content based on our modern society can be created. The timelessness of shayari awaits.
शुभ मंगलवार # jai hanuman# जय हनुमान
यह विनय पत्रिका से लिया गया पद है।
मंगल-मूरतिमारुत-नंदन। सकल-अमंगल - मूल -निकंदन॥ १।॥
पवनतनयसंतन-हितकारी। हृदय बिराजत अवध-बिहारी॥ २॥मातु पिता, गुरु, गनपति, सारद । सिवा-समेत संभु, सुक, नारद॥ ३ ॥
चरन बंदि बिनवौं सब काहू । देहु रामपद-नेह-निबाहू । ४।
बंदौं राम-लखन-बैदेही। जे तुलसीके परम सनेही॥ ५॥
भावार्थ-पवन कुमार हनुमानजी कल्याणकी मूर्ति हैं। वे सारी बुराइयों की जड़ काटनेवाले हैं॥ १॥ पवनके पुत्र हैं, संतोंका हित करनेवाले हैं ।अवधविहारी श्रीरामजी सदा इनके हृदयमें विराजते हैं॥ २ ॥ इनके तथा माता-पिता, गुरु, गणेश, सरस्वती, पार्वतीसहित शिवजी, शुकदेवजी, नारद॥ ३ ॥इन सबके चरणोंमें प्रणाम करके मैं यह विनती करता हूँ कि श्रीरघुनाथजीकेचरण-कमलोंमें मेरा प्रेम सदा एक-सा निबह रहे, यह वरदान दीजिये ॥ ४ ॥
अन्त में मैं श्रीराम, लक्ष्मण और जानकीजीको प्रणाम करता हूँ, जोतुलसीदासके परमप्रेमी और सर्वस्व हैं ।॥ ५॥
jai Ganesh ji#गणपति
विनय पत्रिका की सौजन्य से
गाइये गनपति जगबंदन। संकर-सुवन भवानी-नंदन॥ १ ॥
सिद्धि- सदन, गज-बदन, बिनायक । कृपा-सिंधु, सुंदर, सब-लायक ।॥ २॥
मोदक-प्रिय, मुद-मंगल-दाता। बिद्या-बारिधि, बुद्धि-बिधाता ।॥ ३॥
मांगत तुलसिदास कर जोरे। बसहिं रामसिय मानस मोरे॥ ४ ॥।
भावार्थ-समपूर्ण जगत्के वन्दनीय, गणोंके स्वामी श्रीगणेशजीका
सिद्धि- सदन, गज-बदन, बिनायक । कृपा-सिंधु, सुंदर, सब-लायक ।॥ २॥
मोदक-प्रिय, मुद-मंगल-दाता। बिद्या-बारिधि, बुद्धि-बिधाता ।॥ ३॥
मांगत तुलसिदास कर जोरे। बसहिं रामसिय मानस मोरे॥ ४ ॥।
भावार्थ-समपूर्ण जगत्के वन्दनीय, गणोंके स्वामी श्रीगणेशजीका
गणोंके स्वामी श्रीगणेशजीका
गुणगाणा कीजिये, जो शिव-पार्वतीके पुत्र और उनको प्रसन्न करनेवाले
हैं। १॥ जो सिद्धियोंके स्थान हैं, जिनका हाथीका- सा मुख है, जो समस्त
विघ्नों के नायक हैं यानी विघ्नोंको हटानेवाले हैं, कृपाके समुद्र हैं, सुन्दर हैं,
सब प्रकारसे योग्य हैं ॥ २॥ जिन्हें लड्डू बहुत प्रिय है, जो आनन्द और
कल्याणको देनेवाले हैं, विद्याके अथाह सागर हैं, बद्धिके विधाता हैं ॥ ३॥
ऐसे श्रीगणेशजीसे यह तुलसीदास हाथ जोड़कर केवल यही वर माँगता है।
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