जिस्म की खूबियों को तो हर कोई परखता है, कोई रूह तक गुजर सके तो बात बने।

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मिलन, ख़्वाब, उल्फ़त या मुहब्बत से सजा मुझको मेरे किरदार को तासीर दे…आ गुनगुना मुझको            Shayaripub.in