जीना एक कला है

*जीवन एक कला है,कलह ना बनने दो*
*किसी की आँख के पानी की खुद को *
*वजह ना बनने दो *

*जीवन में खुशियों को लुटाते हुए चलो *
*गमों को ,दर्द को भूलाते हुए चलो *
*जहान अपना है,नफरत की जगह ना बनने दो *

*गिरते को उठाना कर्म हो अपना *
*कोई ना धर्म हो,बस मानवता ही धर्म हो अपना *
*अपने वजूद में कहीं नफरत ना पलने दो *

*गिले शिकवे नहीं करते,तूझे सब भूल जाना है *
*दर्द में मुस्कुराना है,खुशी से गुनगुनाना है*
सजा के रखें हर पल को,इसे सजा ना बनने दो

किसी के आँख के पानी का खुद को बजह ना बनने दो
अचला एस गुलेरिया


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Good morning

इल्मो अदब के  सारे खजाने गुजर गए... क्या खूब थे वो लोग  पुराने गुजर गए,  बाकी है जमीं पे  फकत आदमी की भीड़,  इन्सां मरे हुए तो  ज़माने गुजर गए...