devotional shayari #✍✍Jai Ram ✍✍

धरम सनेह उभयँ मति घेरी। 
भइ गति साँप छुछुंदरि केरी॥
राखउँ सुतहि करउँ अनुरोधू। 
धरमु जाइ अरु बंधु बिरोधू॥ 

अर्थ:-धर्म और स्नेह दोनों ने कौसल्याजी की बुद्धि को घेर लिया। उनकी दशा साँप-छछूँदर की सी हो गई। वे सोचने लगीं कि यदि मैं अनुरोध (हठ) करके पुत्र को रख लेती हूँ तो धर्म जाता है और भाइयों में विरोध होता है,॥ 

श्री रामचरित मानस 
अयोध्याकांड (५४) 

🙏🌺 जय सीयाराम 🙏 🌺
shayaripub.com 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

happy कृष्ण जन्माष्टमी

जो तू मिटाना चाहे जीवन की तृष्णा  सुबह शाम बोल बन्दे कृष्णा कृष्णा कृष्णा  Shayaripub.in