emotional shayari

हाथ उठाऊँ और तेरा नाम न लूँ कैसे मुमकिन है...

तू मेरी दुआओं में शामिल है आमीन की तरह...
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सुबह सबेरे वाली शायरी

घर के बाहर बहुत अंधेरा है; आओं भीतर शमा जलाएं हम। आशिकी बेखुदी नहीं यारो; प्यार को बन्दगी बनाएं हम।