dil ka dushman

मेरी बेकसूरी  मेरा कसूर बन गया,
जिसे पाला जिगर के लहू से,वो रिश्ता
कसम से
नासूर बन गया।
और जिसे ताउम्र शैतान ही समझा,
वो कुछ ऐसा कर गया ...
...कि हजूर बन गया ।।
MERI BEGUAHI MERA KASOOR BN GYA
JISE DIL  SE LGAYA WO RISHTA NASOOR BN GYA
JISKO DEKHNA NA THA GWARA KBHI
WO DUSHMAN MERA HAJOOR BN GYA
                            shayaripub.in

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

thought of the day

झुकी पलके हैं और होठों पर खामोशी है। आँखें बता रही हैं    अभी मोहब्बत नई-नई है।  अभी न आएगी नींद तुमको, अभी न हमको  चैन आएगा  बेचैनी बता रही...