चल छोड़,shayaripub.in

      अचलाएसगुलेरिया की कलम से
          
       चल छोड़

चल छोड़ छोड़ कहते कहते

वह हमें छोड़ कर चले गए ।

दिल जिनके बक्से में रखा था
वह ताला ठोर कर चले गए ।

मेरी खुली आंखों को सपने दिखाने वाले वो
मेरी बंद आंखों के सपने तोड़ कर चले गए।

हर दर्द से हमें बचाने का वादा करके
बस दर्द के दर्द से रिश्ता जोड़ कर चले गए।                                 shayaripub.in



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