Good night

वैसे ही कुछ कम नहीं थे बोझ दिल पर....
           Shayaripub.in
कम्बख़्त, ये दर्जी भी जेब बायीं ओर ही सिल देता है..!

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टूटे दिल की शायरी

फूल कागज के हैं तो खुशबू कहां से आए  जब जिस्म ही नहीं तो जीना कहां से आए । एहसास है उसे भी सूरज की प्यास का  जब खून ही नहीं तो पसीना कहां से...