Good night

तुम्हारे शहर से होकर गुज़रना ठीक वैसा ही है ; 

जैसे गंगा के अस्सी घाट से आरती में बैठे बिना ही लौट जाना !
     Achlasguleria
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Good night

इतनी ठोकरे देने के लिए                 शुक्रिया ए-ज़िन्दगी,  चलने का न सही         सम्भलने का हुनर तो आ गया ।। Shayaripub.in