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थोड़ा तो आँसुओं के साथ बाहर निकल ए दर्द,

इतना भी क्यूँ जिद्दी बना बैठा है सीने में...
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Good night

इतनी ठोकरे देने के लिए                 शुक्रिया ए-ज़िन्दगी,  चलने का न सही         सम्भलने का हुनर तो आ गया ।। Shayaripub.in