tumse ishq hai

वो महबूब है, उससे सुंदर कुछ भी नहीं,

उसकी एक झलक में ही सारा जहाँ बस जाता है
                Achlasguleria 
Wo mehbooba hai,
us se sunder kuchh bhi nhi
Uski ek jhalak mein hi 
Sara jahan bus jata hai

शाम भी थी धुआँ धुआँ हुस्न भी था उदास उदास
दिल को कई कहानियाँ याद सी आ के रह गईं

मुझ को ख़राब कर गईं नीम-निगाहियाँ तिरी
मुझ से हयात ओ मौत भी आँखें चुरा के रह गईं

हुस्न-ए-नज़र-फ़रेब में किस को कलाम था मगर
तेरी अदाएँ आज तो दिल में समा के रह गईं

तब कहीं कुछ पता चला सिद्क़-ओ-ख़ुलूस-ए-हुस्न का
जब वो निगाहें इश्क़ से बातें बना के रह गईं

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