पर शायद... बिछड़ते वक्त रोना होना चाहिए था 🌷🥺
🌷मेरी बेवफाई पर ..जो चुप है ..
उसे हक जता अपना ..नाराज होना चाहिए था 😠
++अचला एस गुलेरिया++
Shayaripub.in
हर शायरी को सजाते वक्त सोचती हूँ काश!
हम सब भी हर दिल की बात को समझ कर
गुस्से में नहीं शायराना अंदाज में उसे बता सकें कि हम क्या सोचते हैं।
बहुत बार हर एक इंसान दूसरे का भला चाह रहा होता है
परंतु उसे समझने में गलती, रिश्तों में दरार डाल देती है।
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