कौन कहता है मुहुब्बत की जुबाँ होती है
ये हकीक़त तो निगाहों से बयाँ होती है।
वो न आये तो सताती है खलिश सी दिल को
वो जो आये तो खलिश और जवाँ होती है।
KOUN KEHTA HAI MUHHABAT KI JUBAN HOTI HAI
YE HAQIKAT TO NIGAHON SE BAYAN HOTI HAI
WO NA AAYE TO SATATI HAI KHALISH SI DIL KO
WO JO AAYE TO KHALISH AUR JAWAN HOTI HAI
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें