Good morning,shayaripub.in

ज़िंदगी ऐसे ही नहीं संवरती है,,,,, 

कई सुख और दुःख की सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं,,,,,, 

तब जाकर खुशियों की छत नसीब होती है।
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