my latest shayari

मुझे पता है कुछ रास्ते ,जो कहीं,
 आते नहीं, कहीं  जाते नहीं हैं।  
उन रास्तों पर निकलने वाले,
 उनको कभी भूल पाते नहीं हैं।
बेफिक्र उठ जाते हैं महफिल से,
उलझन कोई सुलझाते नहीं है।
थोड़ी सी घुटन पर तोड़ लेते हैं रिश्ता,
 रिश्तों को हम आजमाते नहीं हैं।
सच से यहां नफरतें हैं बहुत,
तो ,अब हम कुछ भी बताते नहीं हैं। 
वह सपने हैं उनको जगना हो अगर 
कसम से कम दे सुलाते नहीं है। 
अकारण को कारण बनाकर गया जो 
घर उसको वापस बुलाते नहीं है ।
घर उसको वापस बुलाते नहीं है।

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