तू या तेरा अहसास

चलो सफर पर निकले साथ साथ
मेरे ख्यालों के हाथ में तेरे सपनों के हाथ
वंदिशों की किश्ती पतवार दूरियों की
समंदर खवाबों का लहरें मजबूरियों की
अहसास की परतों में आरजूओं की तपन
साँसों के आहट में विरह की अगन
तमन्नाओं में मेरी बसा तेरा बजूद
हवायें छू रही या तू भी है मौजूद
लगा कहीं तू भी है मौजूद
              अचला एस गुलेरिया 





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अब थोड़ा अजनबी रहने दो मुझे, मैंने हर बार खास बनकर गैर होना महसूस किया है...!!!