।। जय सियाराम* ।।
सहजता अमृत है,असहजता विष हैं ।
ये कभी खत्म होने वाला नही,
देखने मात्र से तृप्ति हो जाती है..ये सहजामृत हैं ।
सहजता वो अमृत है जिसे पीना नही,जीना हैं ।
...बापू*
।। सहज ।।


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Good morning

इल्मो अदब के  सारे खजाने गुजर गए... क्या खूब थे वो लोग  पुराने गुजर गए,  बाकी है जमीं पे  फकत आदमी की भीड़,  इन्सां मरे हुए तो  ज़माने गुजर गए...