।। जय सियाराम* ।।
सहजता अमृत है,असहजता विष हैं ।
ये कभी खत्म होने वाला नही,
देखने मात्र से तृप्ति हो जाती है..ये सहजामृत हैं ।
सहजता वो अमृत है जिसे पीना नही,जीना हैं ।
...बापू*
।। सहज ।।


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happy कृष्ण जन्माष्टमी

जो तू मिटाना चाहे जीवन की तृष्णा  सुबह शाम बोल बन्दे कृष्णा कृष्णा कृष्णा  Shayaripub.in