#emotional shayari # शायरी#

मेरी महबूबा की शर्मो हया का है अज़ब  हीआलम.

मेरे अल्फाज तो पढ़ती है मेरी आँखें नहीं पढ़ती.
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Good morning

इल्मो अदब के  सारे खजाने गुजर गए... क्या खूब थे वो लोग  पुराने गुजर गए,  बाकी है जमीं पे  फकत आदमी की भीड़,  इन्सां मरे हुए तो  ज़माने गुजर गए...