#emotional shayari # शायरी#

मेरी महबूबा की शर्मो हया का है अज़ब  हीआलम.

मेरे अल्फाज तो पढ़ती है मेरी आँखें नहीं पढ़ती.
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thought of the day

झुकी पलके हैं और होठों पर खामोशी है। आँखें बता रही हैं    अभी मोहब्बत नई-नई है।  अभी न आएगी नींद तुमको, अभी न हमको  चैन आएगा  बेचैनी बता रही...