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🌹🌹राज जी की कलम से ........🌹🌹
आपका रूख-ए मेहताब, आपका हाथ चूम लूँ 
जो मेरा बस, चले तो आपकी हर बात चूम लूँ 

आ जाये जो कभी ख्वाब ,आपका 
वो ख्वाब़ क्या वो नींद क्या, वो रात चूम लूँ

छू जाये आपकी जुल्फों को ब़ारिश की बूँद
वो बूँद क्या बारिश, क्या, मौसमें बरसात चूँम लूँ 
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Good morning

इल्मो अदब के  सारे खजाने गुजर गए... क्या खूब थे वो लोग  पुराने गुजर गए,  बाकी है जमीं पे  फकत आदमी की भीड़,  इन्सां मरे हुए तो  ज़माने गुजर गए...