जय सियाराम #siyaram

*अरथ न धरम, न काम रुचि, गति न चहउँ निरबान।*
*जनम-जनम रति रामपद, यह बरदानु, न आन॥*

*मुझे न अर्थ की रुचि (इच्छा) है, न धर्म की, न काम की और न मैं मोक्ष ही चाहता हूँ। जन्म-जन्म में मेरा श्री रामजी के चरणों में प्रेम हो, बस,* *यही वरदान माँगता हूँ, दूसरा कुछ नहीं॥*
*( अयोध्या काण्ड , भरत भारद्वाज मिलन )*

             *👏जय जय सियाराम👏*
                       *सुप्रभातम*
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Good morning

इल्मो अदब के  सारे खजाने गुजर गए... क्या खूब थे वो लोग  पुराने गुजर गए,  बाकी है जमीं पे  फकत आदमी की भीड़,  इन्सां मरे हुए तो  ज़माने गुजर गए...