good evening

मिल ही जाएगा कोई ना कोई टूट के चाहने वाला,

 अब शहर का शहर तो बेवफा हो नहीं सकता।

बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यों नहीं जाता,
जो बीत गया है वो गुजर क्यों नहीं जाता,
वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में,
जो छोड़  गया है मुझे वो दिल से उतर क्यों नहीं।
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Good night

जुबांनों के पीछे मत चलो, कोई तुम्हें ऐसी..! कहानी नहीं सुनायेगा जिसमें वो खुद गद्दार हो..!!shayaripub.in!!