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मिली हैं रूहें तो
रस्मों की बंदिशें क्यूँ हैं 

यह जिस्म तो ख़ाक हो जाना है
*फिर रंजिशें क्यूँ हैं ।। .
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happy कृष्ण जन्माष्टमी

जो तू मिटाना चाहे जीवन की तृष्णा  सुबह शाम बोल बन्दे कृष्णा कृष्णा कृष्णा  Shayaripub.in