Good morning ,shayaripub.in

मिली हैं रूहें तो
रस्मों की बंदिशें क्यूँ हैं 

यह जिस्म तो ख़ाक हो जाना है
*फिर रंजिशें क्यूँ हैं ।। .
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Good morning

इल्मो अदब के  सारे खजाने गुजर गए... क्या खूब थे वो लोग  पुराने गुजर गए,  बाकी है जमीं पे  फकत आदमी की भीड़,  इन्सां मरे हुए तो  ज़माने गुजर गए...